ज़िंदगी बन गयी है यारो कारखानो सी
एथनई तन्हा है जैसे, टूटे मकानो सी
चलते जा रहे है हम एसकी तलाश मे
आती नही पकड़ ,लगती है आसमानो सी
गुज़रा है जब से बचपन हमारा
ज़िंदगी लगे जैसे कोई दास्तानो सी
बकत एस कदर उलजा हुआ अपने मे
शामने जिसके ख़ुशी आती है बहानो सी
जकड़े गाये नेश हालातो की मजबूरियो मे
उमर अब गुज़रेगी बन के केदखानो सी
ज़िंदगी बन गयी है कारखानो सी
एथनई तन्हा है जैसे टूटे मकानो सी

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