Thursday, April 3, 2008

bhebafa

E bhebafa, koi bhi bhebafa ki bhafa pe ethbar nahi karte
O garo ki bhaho mai rahne bali ham tujse pyar nahi karte

jana hai tho ja, per ek baat hamari yaad rakhna
mushafir,mushafir, ghadi jane ke badh intejar nahi karte

rishte dil ke dekho kaise-kaise hote hai yaro
tut gaye tho tut gaye bayain dard ka ekhtsar nahi karte

mar ke khanjar dil pe-2 , koi chala gaya
eshi bhebafa ka ham-2 intejar nahi karte

lakh safai de-2 , mahboob ban ke bhebafa
magar jo ho gaya-so ho gaya ham nachar nahi karte

ek dfa hi judte hai-2, Nesh es dil ke taar
so dil ki adla-badli-2, koi baar baar nahi karte

Rishto mai

Rishto mai eshi padh gayi Darare
Chale gaye aap kishe ham Pukare

Kya aap gaye khushiyain hi chali gayi
Phike se ab lagne hamko lage ye Najare

Ganto baatain karte the ham chhat pe
Ab kattha hai aashmain bo Shitare

Tanha ye najar dudti hai tumhe
Yaha se baha tak lambe hai Kinare

Gujare kaise tanha shahil pe zindgi
Safar kathin hai ab bin tere Share

Loat aao mita de sare kr sare shikbe
Hay jo hay jo dushman ban gaye Hamare

ख़ामोश ये निगाहे

ये ग़ज़ल हिंदोस्तान और पाकिस्तान के नाम

रिश्तो मे एसी काई जमी की आज शबब मदहोश है
दिलो मे एसी पड़ी दरारे की मुदतो से ज़ुबान ख़ामोश है

ग़ज़ल

एक जैसे हम एक फजा एक ही ज़ुबान
फिर एस दिल मे फ़र्क आ गया कहाँ

मिलता है संगीत, मिलते है रश्मो रिबाज़
क्या सरहदे बनने से बट जाता है जहाँ

होती एक जैसी शाम, एक ही सुब्ह
फिर क्यू बदल गये दिल के अरमान

चाहते तो है हम गिराना ये ढिबार
मगर लामबेहआई फ़ासले -ए- दरमियाँ

देख रही है राश्ता ख़ामोश ये निगाहे
शायद कही ज़ुक आए ये आसमाण

ज़िंदगी

ज़िंदगी बन गयी है यारो कारखानो सी

एथनई तन्हा है जैसे, टूटे मकानो सी


चलते जा रहे है हम एसकी तलाश मे

आती नही पकड़ ,लगती है आसमानो सी


गुज़रा है जब से बचपन हमारा

ज़िंदगी लगे जैसे कोई दास्तानो सी


बकत एस कदर उलजा हुआ अपने मे

शामने जिसके ख़ुशी आती है बहानो सी


जकड़े गाये नेश हालातो की मजबूरियो मे

उमर अब गुज़रेगी बन के केदखानो सी


ज़िंदगी बन गयी है कारखानो सी

एथनई तन्हा है जैसे टूटे मकानो सी

बाहों मे तुम हो, लौटा दे बो नज़ारा कहीं

बाहों मे तुम हो, लौटा दे बो नज़ारा
कहीं ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं

कुछ हम तो, कुछ बो शर्मा रहे थे
धीरे-2 कितने हम क़रीब आ रहे थे
मिल जाता उनकी-2, नज़रो का इशारा कही
ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं

सीमेटा जिन्हे-2, हमने बाहो मे
छ्छूपा रखा था उन्होने निगाहो मे
जाने कैसे बीता, पल बो आबरा कहीं
आए वक़्त लौटा दे, शाम ओब दुबारा कहीं

चूमा था हल्के से, जिनके गालो को
शाहलाया था उन्होने मारे बालो को
क्या पलबर के प्यार को मिले किनारा कहीं

ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं
मत जा, आज शाम छ्छुड़ा के दामन
कितना नेश ने समझाया उनका मन
कह चली छूते ना साथ तुम्हारा कहीं
आए वक़्त लौटा दे, शाम ओब दुबारा कहीं