Thursday, April 3, 2008

बाहों मे तुम हो, लौटा दे बो नज़ारा कहीं

बाहों मे तुम हो, लौटा दे बो नज़ारा
कहीं ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं

कुछ हम तो, कुछ बो शर्मा रहे थे
धीरे-2 कितने हम क़रीब आ रहे थे
मिल जाता उनकी-2, नज़रो का इशारा कही
ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं

सीमेटा जिन्हे-2, हमने बाहो मे
छ्छूपा रखा था उन्होने निगाहो मे
जाने कैसे बीता, पल बो आबरा कहीं
आए वक़्त लौटा दे, शाम ओब दुबारा कहीं

चूमा था हल्के से, जिनके गालो को
शाहलाया था उन्होने मारे बालो को
क्या पलबर के प्यार को मिले किनारा कहीं

ए वक़्त लौटा दे, शाम बो दुबारा कहीं
मत जा, आज शाम छ्छुड़ा के दामन
कितना नेश ने समझाया उनका मन
कह चली छूते ना साथ तुम्हारा कहीं
आए वक़्त लौटा दे, शाम ओब दुबारा कहीं

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