Friday, April 17, 2009

मैनू तेरा शबाब ले बैठा,
रंग गोरा गुलाब ले बैठा,
मैनू जब भी तुसी हो याद आये,
दिन दिहाडे शराब ले बैठा,
किनी बीती ते किनी बाकी ऐ,
मैनू ऐ हो हिसाब ले बैठा.....

कवि शिव कुमार बटालवी

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