Friday, April 17, 2009

इंतज़ार

उनकी बाहो मे अजीब सा संसार मिला
माँगा था खुदा से इतना प्यार मिला

देखती राहू एक टक बन के चकोर
हमको एशे चाँद का दीदार मिला

गुज़ार लू तमाम उमर जिसकी बाहो मे
ए दिल बटला क्यू इतना इसको इंतज़ार मिला

कितनी तन्हा थी ज़िंदगी, जो ये पल ना था
खिल गये दिल मे फूल एसा ख़ुशगूबार मिला

कोई छेड़ता था दिल से, बनके अजनबी
लगता है बेशा ही कोई हमको दिलदार मिला

मत छेड़ ए नेश कही पागल ना हो जौ
छोटी सी उमिदो को एसा एतबार मिला

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